हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत में गुमला जिले से वर्ष 2018 में लापता हुई छह वर्षीय बच्ची के मामले में दाखिल याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने वर्ष 2018 से अब तक जिले में पदस्थापित एसपी और मामले के सभी छह जांच पदाधिकारी को तलब किया है। मामले में अगली सुनवाई नौ जून को होगी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया कि बच्ची अब भी ट्रेसलेस है। मामले की जांच के लिए गठित नई एसआइटी की तीन टीमें मुंबई, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और जम्मू तक गईं, लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं मिल सका।

कोर्ट के आदेश पर गुमला एसपी, एसआइटी प्रमुख और अनुसंधानकर्ता अदालत में उपस्थित हुए। खंडपीठ ने केस डायरी का अवलोकन करने के बाद एसपी से पूछा कि मुख्य आरोपित का बयान अब तक क्यों दर्ज नहीं किया गया। इस पर एसपी ने कहा कि आरोपित के घर जाने पर हर बार उसके बीमार होने की जानकारी दी जाती रही।

गुमला पुलिस सात वर्ष बाद भी बच्ची का पता लगाने में विफल

अदालत ने यह भी पूछा कि वर्ष 2020 में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पीड़िता की मां ने जिन लोगों पर संदेह जताया गया था, उनसे उसी समय पूछताछ क्यों नहीं हुई। खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि गुमला पुलिस करीब सात वर्षों बाद भी बच्ची का पता लगाने में विफल रही है।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य की पुलिस व्यवस्था पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि आज भी लोग थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने जाते हैं तो मुंशी उन्हें भगा देते हैं। मोबाइल खोने पर सनहा दर्ज कराने पहुंचे लोगों को भी परेशान किया जाता है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति धुर्वा और जगन्नाथपुर थाना में देखी जा सकती है। बता दें कि गुमला की रहने वाली चंद्रमुनि उरांव ने सितंबर 2018 से लापता अपनी छह वर्षीय बच्ची की बरामदगी को लेकर हाई कोर्ट में हैबियस कार्पस याचिका दाखिल की है।

पूर्व की सुनवाई में अदालत को बताया गया था कि मामले की गहराई से जांच के लिए नई एसआइटी गठित की गई है। टीम ने दिल्ली जाकर बच्ची के संबंध में जानकारी जुटाने की कोशिश की तथा उसका फोटो विभिन्न स्थानों पर प्रसारित कराया, लेकिन अब तक बच्ची बरामद नहीं हो सकी है।

बोकारो में 

हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत में बोकारो जिले से 14 वर्षीय नाबालिग के लापता होने के मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में सीआईडी एवं पिंडराजोड़ा थाना पुलिस से केस डायरी तलब की है।

मामले की अगली सुनवाई 15 मई को होगी। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया कि नाबालिग के लापता होने के संबंध में उसकी मां ने बोकारो के पिंडराजोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अदालत को बताया गया कि जांच के दौरान पुलिस ने चार संदिग्धों को हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

घटना के पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक नाबालिग का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस अप्रैल माह में जांच सीआइडी को सौंप दी गई है। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला भी पिंडराजोड़ा थाना से जुड़ा हुआ है।

अदालत ने उस चर्चित मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें 18 वर्षीय युवती के लापता होने के बाद थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई थी और आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने आरोपित के साथ थाना परिसर में पार्टी की थी तथा उसे खुला छोड़ दिया था।

अदालत ने कहा कि न्यायालय के दबाव के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार किया और अब युवती का तथाकथित नर कंकाल बरामद होने की बात कही जा रही है। इस मामले में युवती की मां ने अपनी बच्ची की तलाश को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है।

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